संयुक्त राष्ट्र के महा सचिव बैन की-मून ने कहा कि कितनी ग्रीन हाउस गैस घटानी है यह निर्णय बाली में चल रहे सम्मेलन के बाद तय किया जाएगा। 
उन्होंने कहा कि प्रतिनिधियों के लिए ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन की मात्रा तय करना अत्यन्त कठिन कार्य हैं। किन्तु भविष्य में कभी न कभी इस विषय पर निर्णय लेना आवश्यक है। 
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन चीफ युवों डी बोअर ने कहा कि आर. ई. डी. डी. समझौता इस सम्मेलन में मुमकिन नहीं लगता किन्तु जो लोग इस कार्य से जुड़े हैं उन्होंने काफी तरक्की की है। 
यू. एन. एफ. सी. सी. सेक्रेट्रिएट के प्रमुख युवो डी बोअर ने शुरू से ही इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक लक्ष्य-उत्सर्जन कटौती के बारे में सर्वसम्मति की कोई उम्मीद नहीं है। विकसित देशों के लिए एक लक्ष्य तय करने पर भी बहस जारी है। 
अमरीका इससे सहमत है क्योंकि राज्य विभाग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा “हम जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक ऐसा समझौता चाहते हैं जो पर्यावरण की दृष्टि से प्रभावी और आर्थिक रूप से स्थायी हो। 
अमरीका ने क्योटो प्रोटोकौल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस समझौते के अनुसार चीन को उत्सर्जन कम करने के लिए नहीं कहा गया था। चीन और अमरीका अब भी एक नये समझौते को मानने को तैयार नहीं जिसके अनुसार इन्हें सन् 2010 तक 25ः से 40ः उत्सर्जन कम कराना था। 
चीन ने उदाहरण के तौर पर पहले हफ्ते ही कहा था कि समझौते का मसौदा तैयार करने का लक्ष्य सन् 2010 होना चाहिए। 
