बाली रोडमैप ने सन् 2009 को लक्ष्य वर्ष तय किया और 2012 के बाद लागू होने वाले समझौते की उम्मीद दिलाई। इस समझौते से उम्मीद है कि औद्योगिक देशों के लिए उत्सर्जन कटौती के लक्ष्य रखे जाएँगे। बाकी मामलों पर भी फेसला होगा।
अमरीका ने क्योटो प्रोटोकौल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस समझौते के अनुसार चीन को उत्सर्जन कम करने के लिए नहीं कहा गया था। चीन और अमरीका अब भी एक नये समझौते को मानने को तैयार नहीं जिसके अनुसार इन्हें सन् 2010 तक 25ः से 40ः उत्सर्जन कम कराना था।
इस वर्ष का संयुक्त राष्ट्र संघ का जलवायु परिवर्तन सम्मेलन जिसमें सी.ओ.पी. और सी.एम.पी. की बैठकें शामिल हैं अगले हफ्ते बाली, इंडोनेशिया में शुरू होगी। इस सम्मेलन में क्योटो प्रोटोकोल से सम्बन्धित निर्णयों पर वार्ता होगी। सम्मेलन में आये प्रेषक और अन्य जुड़े लोगों का मानना था कि प्रदूषण के कारण होने वाले ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को रोकने के लिये सन् 2012 से आगे का एक विनियामक समझौता सर्वसम्मति से बनाना इस सम्मेलन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
ई॰यू॰ और अन्य मुल्कों का मानना है कि लक्ष्य अभी निर्धारित कर लेना चाहिए जिससे भूमण्डलीय तापक्रम वृद्धि से लड़ने के लिए समय मिल सके किन्तु अमरीका के अनुसार लक्ष्य समझौते पर बहस शुरू होने के बाद निर्धारित होना चाहिए।
दो हफ्तों की बहस के बाद इस वर्ष का जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संघ सम्मेलन अपनी तय तिथि शुक्रवार तक समाप्त होने की आशा है। अगर समझौता नहीं हुआ तो सम्मेलन शनिवार तक अल सकता है।
